ज्योतिबा फुले एवं सावित्री बाई फुले की मूर्ति स्थापित

बुरहानपुर। आखिरकार लंबे समय से माली समाज द्वारा की जा रही मांग पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) के प्रयासों के परिणामस्वरूप पूर्ण हुई। बुरहानपुर में शनवारा-लालबाग रोड स्थित श्री भैरव बाबा मंदिर के समीप महात्मा ज्योतिबा फुले एवं माता सावित्रीबाई फुले की प्रतिमा स्थापित हो गई है।
ज्ञात हो कि तत्कालीन मंत्री श्रीमती चिटनिस द्वारा महात्मा महात्मा ज्योतिबा फुले एवं माता सावित्रीबाई फुले जी की आदमकद मूर्ति नगर निगम को समाज के हस्ते सौंपी गई थी। आपत्तियों एवं अन्य व्यवधानों के कारण महापुरुषों की प्रतिमाओं की स्थापना में रुकावटें आ रही थी। रविवार को समाज के वरिष्ठों एवं जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में प्रतिमा की स्थापना की गई।
इस अवसर पर समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि क्रांतिसूर्य महात्मा ज्योतिबा फुले एवं मां सावित्री बाई फुले की मूर्ति स्थापना में पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) का योगदान अविस्मरणीय रहा। आधुनिक भारत में महात्मा की उपाधि से सम्मानित श्रद्धेय स्वर्गीय ज्योतिबा फुले एवं भारत की प्रथम महिला शिक्षिका श्रद्धेय मां सावित्रीबाई फुले की मूर्तियां स्थानीय भैरव मंदिर-शनवारा रोड की पश्चिम दिशा में स्थापित की गई। वर्ष 2018 में तत्कालीन मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस के प्रयासों से उक्त स्थान के विकास एवं उन्नयन का कार्य प्रारंभ हो गया था, किंतु बीच में उनके विधायक नहीं रहने एवं कोरोना काल के आ जाने से यह स्थापना का कार्य थोड़ा लंबित हुआ। तत्कालीन समय में पूर्व मंत्री श्रीमती चिटनिस के योगदान से आज स्थापित की गई मूर्ति की व्यवस्था हो पाई थी। नगर निगम एवं अन्य विभागों की अनुमतियां प्राप्त करने में भी उनका पर्याप्त सहयोग रहा। उनके प्रयासों की परिणीति में आज महात्मा ज्योतिबा फुले एवं मां सावित्रीबाई फुले की मूर्तियां नगर में स्थापित हो पाई। संयुक्त माली समाज जिला बुरहानपुर एवं समस्त प्रादेशिक माली, कुशवाह समाज संगठन ने पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस का महात्मा ज्योतिबा फुले एवं मां सावित्री बाई फुले की मूर्तियों की स्थापना में प्रदान किए गए अविस्मरणीय सहयोग के लिए हृदय से आभार व्यक्त करता है।
गत दिनों नवनिर्वाचित सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री मनोज लधवे, निवृत्तमान नगर निगमाध्यक्ष मनोज तारवाला, प्रभाकर महाजन, काशीनाथ महाजन, लक्ष्मण महाजन, मुकेश शाह, नगर निगमायुक्त सहित अन्य अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण किया था। सांसद श्री पाटिल ने अतिशीघ्र प्रतिमा स्थापना हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए थे।
पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फूले व माता सावित्री फूले के द्वारा समाज को दिया गया योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने कहा कि महापुरूषों की प्रतिमा लगाने से उन्हें देख उनके जीवन चरित्र से प्रेरणा लेने की सीख मिलती है।
श्रीमती चिटनिस ने कहा कि स्त्रियों की शिक्षा को लेकर लोग उदासीन थे, ऐसे में ज्योतिबा फुले ने समाज को इन कुरीतियों से मुक्त करने के लिए बड़े पैमाने पर आंदोलन चलाए। उन्होंने महाराष्ट्र में सर्वप्रथम महिला शिक्षा तथा अछूतोद्धार का काम आरंभ किया था। उन्होंने पुणे में लड़कियों के लिए भारत की पहला विद्यालय खोला। माता सावित्री फूले ने महिलाओं में शिक्षा की अलख जगाई। वर्तमान में महिलाएं शिक्षा के क्षेत्र में पुरूष से आगे निकल रही है। 1840 में ज्योतिबा का विवाह सावित्रीबाई से हुआ था। उनकी पत्नी सावित्री बाई फुले भी एक समाजसेविका थीं। उन्हें भारत की पहली महिला अध्यापिका और नारी मुक्ति आंदोलन की पहली नेता कहा जाता है। बच्चों का अनाथालय भी ज्योतिबा ने खोला। विभिन्न प्रमुख सुधार आंदोलनों के अतिरिक्त हर क्षेत्र में छोटे-छोटे आंदोलन जारी थे जिसने सामाजिक और बौद्धिक स्तर पर लोगों को परतंत्रता से मुक्त किया था। लोगों में नए विचार, नए चिंतन की शुरुआत हुई, जो आजादी की लड़ाई में उनके संबल बने। उन्होंने किसानों और मजदूरों के हकों के लिए भी संगठित प्रयास किया था। श्रीमती चिटनिस ने कहा कि महात्मा फुले एक समतामूलक और न्याय पर आधारित समाज की बात कर रहे थे इसलिए उन्होंने अपनी रचनाओं में किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए विस्तृत योजना का उल्लेख किया है। पशुपालन, खेती, सिंचाई व्यवस्था सबके बारे में उन्होंने विस्तार से लिखा है। गरीबों के बच्चों की शिक्षा पर उन्होंने बहुत जोर दिया। उन्होंने आज के 150 साल पहले कृषि शिक्षा के लिए विद्यालयों की स्थापना की बात की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Our Visitor

1 1 8 3 8 6
Users Today : 126
Users Yesterday : 592
Users This Month : 3148
Users This Year : 35658
Total Users : 118386