गोवर्धन पर्वत की पूजा – अर्चना कर इंद्र का घमंड चूर – चूर किया

खण्डवा । बिजली की भयानक चमक ,बादलों की दहला देने वाली गर्जना और लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने ग्वाल बालों को भयभीत कर तब कान्हा ने सभी से कहा कि गोवर्धन पर्वत से सहायता के लिए प्रार्थना करो । सभी ने इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत से प्रार्थना की । कान्हा ने लीला रचते हुए अपनी कनिष्का पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया उसके नीचे आकर सभी ग्वाल बालो ने अपने प्राणों की रक्षा की । इंद्र का घमंड चूर -चूर हो गया । मूसलाधार बारिश रुक गई । इंद्र भगवान कृष्ण की शरण मे आकर क्षमा मांगने लगा । इस प्रकार गोवर्धन पर्वत की पूजा करने की शुरुआत हुई जो अभी भी चल रही । वृन्दावन से खण्डवा आए सुप्रसिद्ध कथा वाचक पंडित विजय शास्त्री ने यह प्रसंग बड़ी संख्या में कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालुओ को सुना कर भाव विभोर कर दिया । कथा प्रवक्ता संजय चौबे ने बताया कि कान्हा बने मुकुंद दीक्षित उनके माता -पिता मुख्य यजमान पवन दीक्षित रानी दीक्षित और उर्मिला
दीक्षित सहित राम जानकी मंदिर महिला मंडल की सदस्यों ने गोवर्धन पर्वत की विधिवत पूजा -अर्चना आरती कर परिक्रमा की । छप्पन भोग भी लगाया गया ।
राम जानकी मंदिर महिला मंडल के तत्वाधान में औदीच्य ब्राह्मण समाज धर्मशाला नागबाबा मंदिर खड़कपुरा के सामने चल रही संगीतमय श्रीमद भागवत में रविवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए । कथा वाचक पंडित विजय शास्त्री रोजना संगीतमय भागवत कथा का वाचन कर विभिन्न प्रसंगों में छीपे संदेशों को सरल रूप से श्रद्धालुओं के समक्ष रख रहे हैं । कथा प्रवक्ता संजय चौबे ने बताया कि संगीतमयी श्री मद भागवत कथा का समापन 30 नवंबर को होगा ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Our Visitor

1 2 6 7 2 4
Users Today : 7
Users Yesterday : 71
Users This Month : 3495
Users This Year : 3495
Total Users : 126724