श्री कृष्ण जन्मोत्सव पर जमकर झूमे कथा रसिक

खंडवा। भवानी माता मंदिर प्रांगण में श्रीमद भागवत कथा की रसधारा बह रही है। भक्तों की विशाल संख्या इस माहौल को धर्मामय बना रही है। श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन कथा वाचक पं. आशीष सरमण्डल ने श्रीकृष्ण जन्म लीलाओं का वर्णन किया। श्रीकृष्ण के जन्म पर श्रोता जमकर झूमे। कथा वाचक पं. सरमण्डल ने भगवान श्री कृष्ण जन्म कथा का वर्णन करते हुए कहा कि जीव जब साधना करने बैठ जाता है तब संसार रुपी हथकड़ीयां और पैरों की बेडिय़ां टूट जाती है और ईश्वर के प्रेम के दरवाजे खुल जाते हैं। भगवान कभी जन्म नहीं लेते अवतार धारण करते हैं, प्रगट होते हैं। उन्होंने देवकी-वासुदेव प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। भक्तों का उद्धार करने के लिए भगवान को जेल में प्रगट होना पड़ा, लेकिन उनका लालन पालन नंद गांव में हुआ। पुष्पों की होली खेलते हुए भक्तों द्वारा जन्म उत्सव धूमधाम से मनाया गया। कथा के दौरान भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप की जीवंत झांकी सजाकर जन्मोत्सव मनाया गया। जन्मोत्सव पर श्रोताओं ने जमकर नृत्य किया तथा मिठाई बांट कर खुशिंया मनाई एवं श्रीकृष्ण के जन्म पर बधाईयां व मिठाइयां लुटाई। इस दौरान श्रद्धालु नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की, गाते हुए जमकर झूमे। कथा विश्राम के बाद प्रसाद वितरण किया गया। कथा में बड़ी में संख्या में महिला-पुरूष शामिल थे। समाजसेवी सुनील जैन बताया कि भवानी माता मंदिर प्रांगण में आयोजित भागवत कथा के चौथे दिन पंडित आशीष सरमण्डल ने भागवत कथा के प्रसंगों के साथ ही मां गंगा और मां नर्मदा के संरक्षण व संवर्धन का श्रद्धालुओं को संकल्प दिलवाया। उन्होंने वस्त्र परिधान पर संदेश देते हुए कहा कि आजकल लोगों का पहनावा बदलता जा रहा है, विदेशी पहनावे को अपना कर भारतीय परिवेश का त्याग करते जा रहे है। फैशन के नाम पर फटे वस्त्र पहने जा रहे है। कथा में श्री वामन अवतार की झांकी के साथ कथा में वामन जी के चरित्र एवं राम जन्म कथा का संक्षिप्त वर्णन भी पंडित जी द्वारा किया गया।

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